थर्ड डिग्री टार्चर क्या होता है, जिसे अमित शाह करवाना चाहते है बंद
आपने अक्सर फिल्मो में देखा होगा या किताबो में पढ़ा होगा कि पुलिस दोषी से उसका सच उगलवाने के लिए थर्ड डिग्री टार्चर का इस्तेमाल करती है। मगर क्या आप जानते है कि आखिर ये होता क्या है। बहरहाल आज हम आपको बताएंगे कि आखिर थर्ड डिग्री टार्चर क्या होता है। जिसे गृहमंत्री अमित शाह बंद करवाना चाहते है। सबसे पहले तो हम आपको बता दे कि भारत के गृहमंत्री अमित शाह जी ने पुलिस को यह राय दी है कि अब उन्हें थर्ड डिग्री टार्चर बंद कर देना चाहिए। वो इसलिए क्यूकि यह तरीका अब पुराना हो चुका है। जी हां उनका कहना है कि अब अगर आपको दोषियों को पकड़ना है तो उन्हें पकड़ने के लिए बेहतर इन्वेस्टीगेशन और पुख्ता सबूतों का इस्तेमाल कीजिये।

थर्ड डिग्री टार्चर क्या होता है..
वही अगर हम थर्ड डिग्री टार्चर की बात करे तो इसमें पुलिस सबसे पहले दोषी से आराम से पूछताछ करती है। इसके बाद भी अगर वह सच नहीं बोलता तो हल्के बल से शुरू करके थर्ड डिग्री टार्चर तक हर तरीका अपनाया जाता है। हालांकि अलग अलग मामलो में अलग अलग तरीको का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कि अपराधी को पूरा नंगा रखना, उसे मलमूत्र करने से रोकना या उसे खाना न देना आदि सब चीजे इसमें शामिल है। वही अगर खबरों की माने तो कुछ महिलाओ को कलकत्ता के लाल बाजार पुलिस स्टेशन ले जाया गया। जहाँ उनके कपड़े उतार कर उनके शरीर के कई हिस्सों को जला दिया गया। यहाँ तक कि कई महिलाओ का तो दूसरे अपराधियों द्वारा बलात्कार तक करवाया गया।
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इसके इलावा एक केस में एक पुरुष का हाथ खिड़की से बाँध दिया गया। ताकि वह न तो बैठ सके और न ही सो सके। अब यूँ तो अमित शाह ने इसे पुराना तरीका कह कर बंद करने को कहा है, लेकिन पुलिस अब भी इस तरीके का इस्तेमाल करती है। बता दे कि इस मुद्दे को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कई कैम्पेन चलाएं है। जिसके द्वारा उन्होंने इस तरीके को पूरी तरह से खत्म करने की बात कही है। हालांकि थर्ड डिग्री टार्चर क्या होता है, ये केवल वही लोग समझ सकते है, जिनके साथ इसका इस्तेमाल किया गया है। “दोस्तों आपको क्या लगता है कि क्या इस तरीके को बंद कर देना चाहिए।”
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



